Thursday, August 5, 2010
उर्दू शब्दावली
उर्दू दुनिया की एक बेहद मीठी भाषा है - गजल -नज्म -शेरो शायरी में अक्सर प्रयोग आने वाले शब्दों के
हिन्दी अर्थ यंहा लिख रहा हूँ -
१ किरदार = चरित्र २ जुस्तजू = तलाश ,कामना ३ अंजाम = नतीजा ,परिणति ४ शफ्फाफ = निर्मल
५ खलाओ =शून्य ६ जजीरो = द्वीप ७ लम्स = स्पर्श ८ टलिया = घंटियाँ ९ बर्फाब = ठंडा १० साहिल = किनारा
११ पेशानी = मस्तक १२ अहसास = आभास १३ अरज-ओ -तूल = चौडाई और लम्बाई १४ सुबुक = कोमल
१५ लम्स ऐ तवील = लंबा स्पर्श १६ उफक = क्षितिज १७ हुजूम = तारापुंज १८ सय्यारों = ग्रह १९ गुंचे = कली
२० रुखसारों = कपोल २१ परीवश = परी जैसा २२ बर्क़ = बिजली २३ कायनात = सृष्टी २४ हया = लाज
२५ आगोश = गोद ,आलिंगन २६ सुकू = शांति २७ दरीचो = झरोखा २८ मुसलसल = लगातार
२९ तसव्वुर =कल्पना ३० शफक = सूर्यास्त की लालिमा
हिन्दी अर्थ यंहा लिख रहा हूँ -
१ किरदार = चरित्र २ जुस्तजू = तलाश ,कामना ३ अंजाम = नतीजा ,परिणति ४ शफ्फाफ = निर्मल
५ खलाओ =शून्य ६ जजीरो = द्वीप ७ लम्स = स्पर्श ८ टलिया = घंटियाँ ९ बर्फाब = ठंडा १० साहिल = किनारा
११ पेशानी = मस्तक १२ अहसास = आभास १३ अरज-ओ -तूल = चौडाई और लम्बाई १४ सुबुक = कोमल
१५ लम्स ऐ तवील = लंबा स्पर्श १६ उफक = क्षितिज १७ हुजूम = तारापुंज १८ सय्यारों = ग्रह १९ गुंचे = कली
२० रुखसारों = कपोल २१ परीवश = परी जैसा २२ बर्क़ = बिजली २३ कायनात = सृष्टी २४ हया = लाज
२५ आगोश = गोद ,आलिंगन २६ सुकू = शांति २७ दरीचो = झरोखा २८ मुसलसल = लगातार
२९ तसव्वुर =कल्पना ३० शफक = सूर्यास्त की लालिमा
Wednesday, June 10, 2009
तर्ज- माइन माई मुंडेर पे तेरी बोल रहा है कागा-
ब्याह -शादी में गाने के लिए इस गीत की रचना की है -----
बन्ना और बन्नी ने इक दूजे का हाथ है थामा
वरमाला पहनाकर इक दूजे को मन से माना
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
१
दुल्हन के जोड़े में परियो की रानी लगती है
मेरी छोटी सी गुडिया कितनी प्यारी लगती है
दूल्हा चुपके से देखे --------२ दुल्हन तो शर्माए
रूप देख के दुल्हन का वो मन ही मन इतराए
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
२
लाड प्यार में बचपन बीता और सखियों संग खेली
एक फाँस भी चुभी जो तन में अंखिया अपनी भिगोली
आज वही नन्ही सी लाडो ----२ फेरे लेने आई
मम्मी-पापा से बोले अब घडी विदाई की आई
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
३
पिया मिलन की मन में चाहत पर मन में व्याकुलता
इक मन पिया के घर में और इक पीहर में है अटकता
छोड़ पुराने रिश्ते नाते -----२ नए निभाने आई
बेटी पराया धन है - ये - रीत क्यूँ है बनाई
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
४
सात फेरो के सात वचन तू मन से ही अपनाना
सास ससुर की सेवा करना - मायके को न लजाना
ख़ुशी ख़ुशी बन्ने के संग ---२ तू अपना जीवन बिताना
पर इस ख़ुशी की लहरों में मायके को भूल न जाना
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
बन्ना और बन्नी ने इक दूजे का हाथ है थामा
वरमाला पहनाकर इक दूजे को मन से माना
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
रचयिता -राजू बगडा
बन्ना और बन्नी ने इक दूजे का हाथ है थामा
वरमाला पहनाकर इक दूजे को मन से माना
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
१
दुल्हन के जोड़े में परियो की रानी लगती है
मेरी छोटी सी गुडिया कितनी प्यारी लगती है
दूल्हा चुपके से देखे --------२ दुल्हन तो शर्माए
रूप देख के दुल्हन का वो मन ही मन इतराए
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
२
लाड प्यार में बचपन बीता और सखियों संग खेली
एक फाँस भी चुभी जो तन में अंखिया अपनी भिगोली
आज वही नन्ही सी लाडो ----२ फेरे लेने आई
मम्मी-पापा से बोले अब घडी विदाई की आई
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
३
पिया मिलन की मन में चाहत पर मन में व्याकुलता
इक मन पिया के घर में और इक पीहर में है अटकता
छोड़ पुराने रिश्ते नाते -----२ नए निभाने आई
बेटी पराया धन है - ये - रीत क्यूँ है बनाई
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
४
सात फेरो के सात वचन तू मन से ही अपनाना
सास ससुर की सेवा करना - मायके को न लजाना
ख़ुशी ख़ुशी बन्ने के संग ---२ तू अपना जीवन बिताना
पर इस ख़ुशी की लहरों में मायके को भूल न जाना
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
बन्ना और बन्नी ने इक दूजे का हाथ है थामा
वरमाला पहनाकर इक दूजे को मन से माना
बाजे शहनाई की धुन
तुन तुन तु न न न - तु न न न तुन
रचयिता -राजू बगडा
Thursday, January 1, 2009
Wednesday, November 12, 2008
समय के मोड़
फूला फूला सा यह मौसम
किंतु हवाये टूट गई है
जाने किस पड़ाव पर -फूलो की आवाजे छूट गई है
दिशा दिशा से हाथ मिलाती -लेकिन भीतर डरा डरा सा
शबनम को छूते डर लगता
फूट न पड़े कंही अंगारे
सपनो से आँखे डरती है -सपनो के ही पंख पसारे
यह क्या हुआ समय को -भीतर सूखा ,ऊपर हरा हरा सा
लौट गई है गाती चिडिया
उड़ते गए धूप के फाहे
धूल धुँआ अल्लम -गल्लम ले -आँगन में उतरे चौराहे
कितना बड़ा मिला जग हमको -लेकिन कितना मरा मरा सा
साभार
Saturday, November 8, 2008
हौसला
मै नहीं मानता हूँकि कैद परिंदे के पंखो के थपेडे से -लोहे की दीवार पर कोई असर नहीं होता
कि हथेली के प्रहार से -पत्थर टूट नहीं सकता
कम से कम
चोट खायी हथेली के खून से
पत्थर तर - बतर हो सकता है
और
पिंजरे के इर्द- गिर्द टूटे पंखो का
अम्बार इकट्ठा हो सकता है
और जब
आगामी पीढी आए तो देखे
कि
पत्थर बेदाग नही बचा है
परिंदा चुपचाप नही मरा है ।
साभार
Sunday, November 2, 2008
देखते -देखते
जागते हुए सूरज ने देखा -आदमी छह फुट से एक फुट होता हुआअपनी उबासी तक रह गया है
धुँआ धरती से उठा -आसमान में फैल गया
शोर तेज हुआ तो -आवाज बैठ गई
टहनी पर बैठे पंछी का गीत -कंठ से आते खून में समाया
और पत्ते पत्ते पर जा लगा
तन की खुशी आत्मा का पर्याय नहीं हो पायी
चलता हुआ वक्त ,सरकते हुए पाँव -छाती पर आ कर टिक गए
फूल और तितलियों का सम्बन्ध -झरने की फुहार
पानी में तैरती -मछलियों के रंग -चरवाहे की बांसुरी
सब के सब
आँख के सफेद मोतिये के आगे
हां से न हो गए
हाथो पर टिकती टिकती बिखर गई -सपन कांच की चूडिया
और ग्लोब पर बैठी -आण्विक आँख
यह सारा का सारा देखना बहुत मुश्किल था
देखते देखते सूरज -समंदर में उतर गया
साभार
Friday, October 31, 2008
बेटियाँ
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